छत्तीसगढ़ की जनजाति

छग में मुख्यत: 5 विशेष पिछड़ी जनजातिया थी जबकि 2012 में छग सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करके दो और जनजातियों भूंजिया व पंडो को इस श्रेणी में शामिल किया जिससे इनकी संख्या 7 हो गयी है।

छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियां

  1. बैगा- कबीरधाम,बिलासपुर, कोरिया, राजनांदगाव,मुंगेली।

2. पहाड़ी कोरवा- सरगुजा, जशपुर, कोरबा, बलरामपुर।

3. पण्डो- सूरजपुर,बलरामपुर,सरगुजा।

4. कमार- गरियाबंद,धमतरी,महासमुंद,कांकेर।

5. अबूझमाड़िया- नारायणपुर,दंतेवाड़ा,बीजापुर।

6. भुंजिया- गरियाबंद,धमतरी।

7. बिरहोर- रायगढ़,जशपुर, बिलासपुर, कोरबा।

केंद्र सरकार द्वारा

1. अबुझमाड़िया

अबुझमाड़िया मुख्य रूप से नारायणपुर एवं बीजापुर जिले में निवास करते हैं ।
अबुझमाड़िया गोंड जनजाति की उपजाति है ।

कृषि पद्धति : पेद्दा।

अबुझमाड़ का अर्थ’ : – अज्ञात’ अबुझमाडिया अपने आप को मेताभूम के नाम से जानते हैं ।

2. बैगा

बैगा जनजातियों का निवास मैकल पर्वत श्रेणी क़र्वधा, राजनांदगांव, मुंगेली, बिलासपुर जिले में हैं।

बैगा जनजाति गोंडों के पुजारी (पुरोहित) के रूप में कार्य करते हैं ।
बैगा सर्वाधिक गोदना प्रिय जनजाति है।

3. बिरहोर

बिरहोर जनजाति का निवास मुख्यत: रायगढ, जशपुर, जिले में है ।
बिरहोर जनजाति पर ‘द बिरहोर एस.सी.राय की रचना है ।
बिरहोर का सामान्य अर्थ बनचर होता है ।

4. कमार

कमार जनजातियों का निवास गरियाबंद जिले में बिन्द्रानवागढ़, देवभोग तहसीलों में एवं आंशिक रूप से धमतरी जिले में पाई जाती है।
कमार मुख्य रूप से गरियाबंद जिले में निवास करती है ।
इस जनजाति का प्रमुख कार्य बांस शिल्प है।
सर्वाधिक गोदना गोदवाने वाली जनजाति कमार है।

5. कोरवा

कोरवा जनजाति का निवास स्थान जशपुर, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, रायगढ़, कोरिया जिले में है.
इनकी दो प्रजातियां हैं :-
1. पहाड़ी कोरवा
2. दिहाड़ी कोरवा

कोरवा जनजाति पेड़ों के उप्पर मचान बना कर रहते हैं।

राज्य सरकार द्वारा 

राज्य सरकार द्वारा दो जनजातियों को विशेष पिछड़ी जनजातियों में शामिल किया गया है।
1. भुंजिया
2. पंन्डो

1. भुंजिया

राज्य सरकार द्वारा भुंजिया जनजाति के विकास के लिए “भुंजिया विकास” प्राधिकरण संचालित किया जा रहा है

2. पंन्डो

यह जनजाति अंबिकापुर क्षेत्र में निवास करती है। राज्य सरकार द्वारा पंन्डो जनजाति के लिए “पंन्डो विकास” प्राधिकरण संचालित किया जा रहा है ।