छत्तीसगढ़ का भू-गर्भिक संरचना 

छत्तीसगढ़ का भू-गर्भिक संरचना-पृथ्वी के भू-गर्भिक संरचना में छत्तीसगढ़ की मिटटी ,खनिज, वनों की विविधता, और कृषि योग्य भूमि आदि का अध्यन किया गया है |हमारा परदेश प्रायद्वीप का भाग होने के कारण यहाँ की भू-गर्भिक संरचना प्राचीनतम शैल समूहों से समृद्धि है .

1. अर्कियान युग के शैल समूह 

अर्कियान युग के शैल समूह पृथ्वी की प्राचीनतम एवं कठोर चट्टान है तथा सबसे गहराई में पी जाती है .यह चट्टान मुलतः लावा के ठंडा होने से निर्मित जीवाश्म रहित चट्टाने है यह लगभग छत्तीसगढ़ की 50 % भाग में है इन चट्टानों से ग्रेनाईट, फेल्सपार, क्वार्टज़ आदि खनिज पाए जाये है |

प्रदेश में सर्वाधिक विस्तार अर्कियान युग के शैल समूह का है. जो की सर्वाधिक गहराई में प्राप्त होने वाला एवं सबसे प्राचीन  शैल समूह है.

  • प्रतिशत – 50 % से अधिक
  • बघेलखंड का पठार   – अंबिकापुर
  • जसपुर समरी पाट   – समरी, जशपुर, बगीचा, कुनकुरी, पत्थलगांव क्षेत्र में पाए जाते है.
  • छत्तीसगढ़ का मैदान – घरघोड़ा , पेंड्रा, लोरमी, पंडरिया, महासमुंद, राजिम, कुरूद, धमतरी में उपलब्ध .
  • दण्डकराय का पठार  – चारामा, भानुप्रतापपुर, कांकेर ,कोंडागांव, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाडा क्षेत्र

2. धारवाड़ शैल समूह 

धारवाड़ शैल समूह जलीय अवसादी चट्टानें है जो आर्कियाँ चट्टानों के अपरदन से निर्मित है इसमें भी जीवाश्म नहीं होता है . धारवाड़ चट्टानें कृषि के लिए अनुपयुक्त है  इस प्रदेश लौह अयस्क की प्राप्ति होती है .छत्तीसगढ़ की बाह्य सीमा पर चारो ओर धारवाड़ क्रम का विकास है इसकी 3 सीरिज है. संसाधनों की दृष्टी से यह सर्वाधिक समृद्ध शैल समूह है. प्रमुख खनिज – लौह अयस्क, टिन अयस्क |

  1. बिलासपुर संभाग में चिल्फी घाटी |
  2. रायपुर संभाग में सोनाखान सीरिज |
  3. दुर्ग – बस्तर संभाग में लौह अयस्क सीरिज |

3. कडप्पा शैल समूह 

  • ग्रेनाईट चट्टानों के अपरदन से कडप्पा शैल समूह का निर्माण हुआ है ,पंखाकर आकृति में इन्ही चट्टानों  से छत्तीसगढ़ के मैदान का निर्माण हुआ है. यह छात्तास्गढ़ में लगभग 20 – 30 % भू भाग में फैला हुआ है .
  • इसके 2 वर्ग है  -रायपुर श्रेणी और चंद्रपुर
  • इसमें स्लेट , चूनापत्थर , डोलोमाईट , एवं क्वार्टज़ खनिज पाए जाते है
  • कडप्पा समूह में निक्षेपित कछारी मिटटी धान की खेती के लिए सर्वोत्तम है .

4. विध्यन शैल समूह

  • यह पुराना संघ के अंतर्गत दुतिया समूह है.भारत में इसका विस्तार विन्द्याचल के सम्नातर पूर्व से पश्चिम तक सोन नदी घाटी में हुआ है.
  • कडप्पा काल के बाद इसका निर्माण हुआ है , इसमें चुना पत्थर , बलुआ पत्थर पाया जाता है यह चट्टानें रायपुर , बालोद और जगदलपुर के क्षेत्रों में पाया जाता है .

5. दक्कन ट्रैप

  • दरारी ज्वालामुखी से निकले बेसाल्ट युक्त लावा से दक्कन ट्रैप शैल समूह का निर्माण हुआ है दक्कन ट्रैप के अपरदन से कलि मिटटी का निर्माण हुआ है .
  • छत्तीसगढ़ में दक्कन ट्रैप मैकल पर्वत श्रेणी के पूर्वी भाग तक पाया जाता है.
  • इसका विस्तार कोरबा , कवर्धा, सरगुजा एवं जशपुर तक पाया जाता है.
  • खनिज -बाक्साइट

6. गोंडवाना शैल समूह 

  • नदियों के अवसादों से युगों से जमे वनस्पत्ति एवं जीवों के अवशेष से एन चात्तानोंका निर्माण हुआ है
  • 17 % भाग में गोंडवाना शैल समूह का विस्तार है .
  • उपरी गोंडवाना शैल क्रम मनेन्द्रगढ़ , बैकुंठपुर, जशपुर आदि में विस्तार है
  • निचली गोंडवाना शैल क्रम सरगुजा , कटघोरा, कोरबा , खरसिया, रायगढ़ आदि में विस्तार है .
  • लेटेराइट  दक्कन के क्षरण से बनता है इसमे फसल की उत्पादकता कम होती है .

छत्तीसगढ़ की धरातलीय स्वरुप :-

छत्तीसगढ़ के धरातल को बाह्य भू-दृश्य के आधार पर निम्न भागों में बता गया है .

A. पहाड़ी क्ष्रेत्र 

  • चांगभखार  देवगढ पहाड़ी – छत्तीसगढ़ के उत्तरी भाग में पाया जाया है इसकी सबसे ऊँची चोटी देवगढ है जनकपुर, बैकुंठपुर, मनेन्द्र गढ़ , अंबिकापुर क्षेत्र में पाया जाता है .

1. छुरी उदयगढ़ पहाड़ी 

  • उत्तरी भाग में इसका सघन वन है कुसमी, रामानुजगंज, घरघोड़ा, कोरबा, धरमजयगढ़ आदि में पाया जाता है.

2. मैकल पर्वत श्रेणी  

  • बिलासपुर कवर्धा , राजनादगांव , यह नर्मदा एवं महानदी प्रवाह तंत्र को अलग करती है .
  • अबुझमांड की पहाड़ियां – बस्तर क्षेत्र में सर्वाधिक वर्षा वाला दुर्लभ क्षेत्र पंखान्जुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर क्षेत्र .

3. मैदानी क्षेत्र 

राज्य का हृदय प्रदेश छत्तीसगढ़ का मैदान तथा धान का कटोरा कहे जाने वाला भाग है , बिलासपुर , रायगढ़ मैदान , हसदो -मांड मैदान, शिवनाथ पार मैदान , शिवनाथ – महानदी दोआब,मुंगेली, जांजगीर, चाम्पा, दुर्ग , बेमेतरा, राजनंदगांव, कवर्धा, और रायपुर सम्मिलित है .

  • बस्तर का मैदान – दक्षिणी मैदान क्षेत्र में ,गोदावरी और शबरी नदी का मैदान
  • रीहन्द का बेसिन – उत्तरी सीमा पर , गंगा अपवाह तंत्र का हिस्सा , वाड्रफनगर .
  • कन्हार बेसिन – राज्य के उत्तर -पूर्वी सीमा पर , गंगा अपवाह तंत्र का हिस्सा ,बलरामपुर .
  • सरगुजा बेसिन – सरगुजा मुख्य भूमि पर , अंबिकापुर ,सरगुजा और सूरजपुर .
  • हसदो रामपुरा बेसिन – मुख्या नदी हसदो , कोरिया , बिलासपुर, कोरबा जिला .
  • कोरबा बेसिन – पेंड्रा का पठार एवं छुरी की पहाड़ियां .
  • रायगढ़ बेसिन – उदयपुर एवं छुरी पहाड़ियों से लगा हुआ ,रायगढ़ और कोरबा जिला .
  • कोटरी बेसिन – राज्य के दक्षिण – पश्चिम सीमा पर दंतेवाडा में स्थित एवं मोहला तहसील  राजनांदगांव .

B. पठार क्षेत्र 

  • पेंड्रा लोरमी पठार – छत्तीसगढ़ के मैदान में उत्तर -पश्चिम सीमा पर वनाच्छादित ,पेंड्रा बिलासपुर , लोरमी मुंगेली, पंडरिया कवर्धा, कटघोरा कोरबा .
  • बस्तर का पठार – दण्डकराय का पठार ,खनिज संपन्न, वनाच्छादित ,इन्द्रावती एवं शबरी मुख्य नदी ,कांकेर, चारामा, जगदलपुर, केशकाल, कोंडागांव.
  • दुर्ग उच्च भूमि – दल्ली राजहरा की पहाड़ियां ,लौह अयस्क से संपन्न ,बालोद एवं मोहला तहसील राजनंदगांव.
  • धमतरी महासमुंद उच्च भूमि – धमतरी , कुरूद, राजिम, गरियाबंद ,देवभोग,सरईपाली,महासमुंद .

C. पाट क्षेत्र 

  • मैनपाट – छत्तीसगढ़ का शिमला , तिब्बतियों की शरणस्थली ,ठंडा प्रदेश ,बाक्साईट का भण्डार, अंबिकापुर, सरगुजा.
  • जरंग पाट – सरगुजा के सीतापुर क्षेत्र .
  • समरी पाट – राज्य की सबसे ऊँची चोटी गौरलाटा स्थित है .
  • जशपुर पाट – वनाच्छादित , सबसे बड़ा पाट प्रदेश , जशपुर, बगीचा, कुनकुरी,पत्थलगांव .