Uncategorizedछत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियां या आदिवासी

छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियां या आदिवासी

छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियांछत्तीसगढ़ राज्य एक जनजाति बाहुल्य राज्य है, छत्तीसगढ़ में कुल 42 जनजातियां पाई जाती है, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजाति गोंड है, इसके अतिरिक्त कँवर, बिंझवार, भैना, भतरा, उरांव, मुंडा, कमार, हल्बा, बैगा, भरिया, नगेशिया, मंझवार, खैरवार और धनवार जनजाति भी काफी संख्या में है।

छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियां :-

दोस्तों आज आप लोगो को कुछ महत्वपूर्ण छत्तिसगढ की जनजातियो के बारे में जानने को मिलेगा .जो छत्तीसगढ़ की किसी भी परीक्षा की दृष्टी से महत्व पूर्ण है जैसे – CGPSC, CGVyapam, CG Police, Patwari, RI etc.

छत्तीसगढ़ की गोंड जनजातिया

  • गोंड जनजाति :जनसंख्या की दृष्टि से ये राज्य की सबसे बड़ी जनजाति है। ये बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, सुकमा,जांजगीर-चंपा और दुर्ग जिले में पाये जाते है।गोंड तथा उसकी उपजातिया स्वयं की पहचान ‘कोया’ या ‘कोयतोर शब्दों से करती है जिसका अर्थ ‘ मनुष्य’ या ‘पर्वतवासी मनुष्य’ है।
  • गोंड जनजाति में मदिरापान का काफी ज्यादा प्रचलन है। इनके मुख्य देवता ‘दूल्हा देव’ है।इनमे विधवा तथा बहु विवाह का प्रचलन भी पाया जाता है। गोंड में दूध लौटावा विवाह भी देखने की मिलता है। ये लोग बहूत ईमानदार होते है।
  • इस प्रजाति की खेती में ‘नरोत’, ‘भरोत’, ‘राय मेना’, ‘कंठ में’ और ‘रेमेना’ आदि प्रमुख हैं। जनों में वंशवाद है। मुख्यालय मुकद्दम गांव का मुख्यालय है।
  • ‘बै’ का अर्थ है- “ओझा या शमन“। इस तकनीक के साथ-साथ असेंशन भी लॉग इन किया जाता है। ‘ और ‘लमसेना’ प्रवृत्त है। बैला के गुण पर आधारित है। इस प्रकार दक्ष के गुण पर आधारित है।

छत्तीसगढ़ की कोरबा जनजातिया

  • कोरबा जनजाति : ये कोरबा,बिलासपुर,सरगुजा,सूरजपुर,एवं रायगढ़ जिले के पूर्वी भाग में निवास करते है। इनके उपजाति में ‘ दिहारिया’ एवं ‘पहाड़ी कोरबा प्रमुख है। दिहारिया कोरबा कृषि कार्य करते है। इस कारण ‘किसान कोरबा भी कहा जाता है।
  •  पहाड़ी कोरबा को ‘बेनबरिया’ भी कहा जाता है। कोरबा जनजाति की अपनी पंचायत होती है। जिसे ‘मैयारी’ कहते है। कोरबा जनजाति का मुख्य त्योहार ‘करमा’ होता है।
  • ये नारायणपुर, बस्तर, कोंडा और बिलासपुर में वृद्धि है। ययां, भुईहार और पांडो इस प्रजाति की फसल भूमि है। ‘भीमसेन’ इन लोगो का मुख्य देवता है।

छत्तीसगढ़ की हल्बा जनजातिया

  • हल्वा जनजाति : ये बस्तर, रायपुर, कोंडागांव, कंकेर, सुकमा, दांतेवारा और दुर्ग में रहने की जगह है।
  • इनकी उपजातियों में बस्तरिया,भतेथिया,छत्तीसगढ़िया आदि मुख्य है। हलवाहक होने के कारण इस जनजाति का नाम हल्वा पड़ा है।

छत्तीसगढ़ की कोरकू जनजातिया

  • कोरकू जनजाति : ये रायगढ़,सरगुजा,बलरामपुर और जशपुर जिले में रहते हैं। मोधीर, बवारी, रूमा, नहाला, बोडोया प्रजनन क्षमता है।
  • मोवासी, बवारी, रूमा, नहाला, बोडोया आदि इनकी उपजातियां है।
  • इस जनजाति में विवाह संबंध में वधु-धन चुकाना पड़ता है। इनमे तलाक़ प्रथा एवं विधवा विवाह का भी प्रचलन है।

छत्तीसगढ़ की बिंझवार जनजातिया

  • बिंझवार जनजाति : ये बिलावासपुर, रायपुर,बलौदा बाजार में रहने वाले हैं। ये “विध्याचल वासिनी” की पूजा करते हैं।
  • ये अपने को विंध्यवासिनी पुत्री “बारह भाई बेटीकर” को अपना पूर्व मानते हैं। वीर नारायण सिंह वर्ग के।

छत्तीसगढ़ की कमार जनजातिया

  • कमार जनजाति : ये रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़,दुर्ग,गरिया बंद, राजनांद गांव,जांजगीर-चाम्पा, जशपुर,कोरिया,सरगुजा के वन क्षैत्रों में रहने वाले हैं।
  •  इनका मुख्य देवता ” दूल्हा देव” है। ये अधिकतर कृषि मजदुर के रूप में खेतो में काम करते है। ये लकड़ी और बांस की चीजें बनाने में निपुण होते है

छत्तीसगढ़ की कंवर जनजातिया

  • कंवर जनजाति : ये बिलासपुर,पुर, रायगढ़, जिंगीर-चांम्पा और सरगुजावर में स्थिति है।
  •  ये पैदा करने वाली महाभारत के कैरव से. इनमे संगोत्री लग्न और विवाह विवाह है। “सगराखंड” प्रमुख देवता है। किसान किसान मजदुर है।

छत्तीसगढ़ की खारवार जनजातिया

  • खैरवार जनजाति :ये सरगुजा,सूरजपुर,बलरामपुर तथा बिलासपुर जिले में पाये जाते है।इन्हे ‘कथवार’ भी कहा जाता है।
  • कत्था का व्यवसाय करने के कारण इस जनजाति का यह नाम पड़ा है।

 

छत्तीसगढ़ की भैना जनजातिया 

  • भैना जनजाति :सतपुड़ा पर्वतमाला एवं छोटानागपुर पठार के बीच सधन वन क्षेत्र के मध्य बिलासपुर, जांजगीर चाम्पा, रायगढ़,रायपुर,बस्तर जिलो में पाये जाते है।
  •  इस जनजाति की उत्पत्ति मिश्र संबंधो के कारण हुआ प्रतीत होता है। किंवदन्ती के अनुसार ये ” बैगा और कंवर ” की वर्ण संकर संताने है।
  • यह पैदा होने की संभावना है। किंवदंती के ये “स्वतंत्रता और कंवर” की वर्णसंकर संताने है।

छत्तीसगढ़ की ओरांव जनजातिया

  • ओरांव जनजाति: ये रई, जशपुर, सरगुजा और बिलाैस नगर में वृद्धि है। मछली के प्रकार, मछली के बच्चे के रूप में इसे तैयार करते हैं। इनमे जैसी जगहों में रहने वाले लोग।
  •  इनमे विवाह से पूर्व यौन संबंध रखता है। इनमे अलग-अलग,विविधता और बहु-विवाह का भी है।
  • ओरांव के प्रमुख देवता ” धर्मेश ” है, जो सूर्य देवता का ही रूप है।

छत्तीसगढ़ की बैगा जनजाति

  • बैगा जनजाति :इस जनजाति की उपजातियों में ‘नरोतिया’, ‘भरोतिया’, ‘रायमैना’, ‘कंठमैना’ और ‘रेमैना’ आदि प्रमुख हैं। बैगा लोगों में संयुक्त परिवार की प्रथा पायी जाती है। इनमें मुकद्दम गाँव का मुखिया होता है।
  • ‘बैगा’ का अर्थ होता है- “ओझा या शमन”। इस जाति के लोग झाड़-फूँक और अंध विश्वास जैसी परम्पराओं में विश्वास करते हैं।इस जाति का मुख्य व्यवसाय झूम खेती एवं शिकार करना है।
  • इस जाति के लोग शेर को अपना अनुज मानते हैं।इनमें सेवा विवाह की ‘लामझेना’, ‘लामिया’ और ‘लमसेना’ प्रथा प्रचलित है।बैगा जनजाति के लोग पीतल, तांबे और एल्यूमीनियम के आभूषण पहनते हैं।
  • इस जाति में ददरिया प्रेम पर आधारित नृत्य दशहरे पर एवं परधौनी लोक नृत्य विवाह के अवसर पर होता है।

छत्तीसगढ़ की मारिया जनजाति

  • मारिया जनजाति :ये नारायणपुर, बस्तर,कोंडागांव एवं बिलासपुर जिले में पाये जाते है।
  •  भूमियां, भुईहार एवं पांडो इस जनजाति की प्रमुख उपजाति है। ‘भीमसेन’ इन लोगो का मुख्य देवता है।

FAQ

Q. छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जाति की संख्या कितनी है?

Ans: राज्य की कुल जनसंख्या 2,08,33,803 है। राज्य में कुल 44 अनुसूचित जातियाँ निवास करती है और इस प्रकार राज्य की कुल जनसंख्या का 11.6 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जाति का है।

Q. छत्तीसगढ़ में आदिवासी की जनसंख्या कितनी है?

Ans: अनुसूचित जनजाति वर्ग के कुल पुरुष जनसंख्या 85118, महिला जनसंख्या 88859 इस प्रकार कुल जनसंख्या 173977 है। इसी प्रकार परियोजना क्षेत्र में कुल 3350 कमार परिवार निवासरत है, जिनकी कुल जनसंख्या 14285 एवं कुल 1606 भुंजिया परिवार निवासरत है.

Q. छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा कौन सी जाती है?

Ans: जाति-धर्म के आधार पर छत्तीसगढ़ की जनसंख्या? जाति के आधार पर छत्तीसगढ़ की जनसंख्या पर नजर डाले तो 93.25 प्रतिशत हिन्दू, 2.02 प्रतिशत मुस्लिम, 1.92 प्रतिशत क्रिश्चियन, 0.27 प्रतिशत सिख, 0.28 प्रतिशत बुद्धिस्ट, 0.24 प्रतिशत जैन निवास करते हैं जबकि अन्य जाति के 1.94 प्रतिशत लोग छत्तीसगढ़ में निवास करते हैं।

Q. छत्तीसगढ़ में आदिवासी विकासखंड कितने हैं?

Ans: इसमें बस्तर, नरायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर,सुकमा ,सूरजपुर , बलरामपुर, कोंडागांव, कांकेर, सरगुजा, कोरिया, कोरबा एवं जशपुर पूर्ण रूप से आदिवासी उपयोजना क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। राज्य में कुल 146 विकासखंड हैं, इनमें आदिवासी विकासखंडों की संख्या 85 है।

Q. छत्तीसगढ़ में कौन कौन सी जाति पाई जाती है?

Ans: छत्तीसगढ़ राज्य एक जनजाति बाहुल्य राज्य है, छत्तीसगढ़ में कुल 42 जनजातियां पाई जाती है, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजाति गोंड है, इसके अतिरिक्त कँवर, बिंझवार, भैना, भतरा, उरांव, मुंडा, कमार, हल्बा, बैगा, भरिया, नगेशिया, मंझवार, खैरवार और धनवार जनजाति भी काफी संख्या में है।

Q. छत्तीसगढ़ में कितने प्रतिशत जनजातियां रहती है?

Ans: छत्तीसगढ़ राज्य का लगभग एक तिहाई जनसंख्या जनजातियों की है। 16 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जातियों की है जबकि 42 प्रतिशत जनसंख्या अन्य पिछड़ी जातियों की है। इसकी 80 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है और आजीविका के साधन के रूप में मुख्यतः कृषि पर निर्भर करती है।

Q. छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जाति की संख्या कितनी है?

Ans: राज्य की कुल जनसंख्या 2,08,33,803 है। राज्य में कुल 44 अनुसूचित जातियाँ निवास करती है और इस प्रकार राज्य की कुल जनसंख्या का 11.6 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जाति का है। छत्तीसगढ़ राज्य में सर्वाधिक अनुसूचित जाति वाला जिला रायपुर एवं सबसे कम अनुसूचित जाति वाला जिला दंतेवाड़ा है।

Q.छत्तीसगढ़ में कहाँ और कैसे जनजातियों द्वारा झूम खेती की जाती है?

Ans: इस जनजाति के लोग छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़, लैलूंगा, तमनार विकासखण्ड में, जशपुर जिले के बगीचा, कांसाबेल, दुलदुला, पत्थलगांव विकासखण्डों में, कोरबा जिले के कोरबा, पोड़ी उपरोड़ा, पाली विकासखण्ड तथा बिलासपुर जिले के कोटा व मस्तूरी विकासखण्ड में निवासरत हैं।

Q. छत्तीसगढ़ में झूम खेती कैसे की जाती है?

Ans: स्थानांतरित कृषि या झूम कृषि क्या है?

  • झूम कृषि के तहत पहले वृक्षों तथा वनस्पतियों को काटकर उन्हें जला दिया जाता है| इसके बाद साफ की गई भूमि की पुराने उपकरणों (लकड़ी के हलों आदि) से जुताई करके बीज बो दिये जाते हैं।
  • कुछ वर्षों (प्रायः दो या तीन वर्ष) तक जब तक मृदा में उर्वरता बनी रहती है, इस भूमि पर खेती की जाती है।

Q. जनजातीय समाज में जीवनसाथी प्राप्त करने की कितनी पद्धतियां हैं?

Ans: लोग सामाजिक परंपरा और संस्कृति के अनुरूप आयोजन कराते है। संताल समाज में विवाह को ‘बापला’ कहा जाता है। इस जनजाति में जीवन साथी के चुनने के बारह तरीके हैं

सम्बंधित पोस्ट

Download Our Apps

cgpsc-tyari-google-play-store-app

© 2022 CGPSC Tyari .com